खामोश नगमे ….!!!!!!

कभी गुल ने बुलबुल ने कहा …..
मेरी खामोशी तेरे हज़ार गीतों का जवाब है …
बुलबुल ने कहा ….
मैने तेरे ही एहसासों को आवाज़ दी ….
तुने कभी सोचा, मेरे उन नगमो का क्या हुआ …
जो कहे .. न कहे .. कभी लबो तलक आके रह गए …

पलक ……

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