ख्वाहिश है कुछ यु तुज से मिलु कभी

Hindi Poems

ख्वाहिश है कुछ यु तुज से मिलु कभी मैं हो सारी दुनिया सोई ..बस जगे हो तुम और मैं फर्क क्या मुझे हो जो उस रात ना निकले चाँद दिखता हैं यु भी तेरा चेहरा चाँद मैं मुझे तुम धीरे से कुछ कहते कहते रुक जाओ और फिर रात से कहो एक पल के लिए थम जाओ वक्त भी थम जाए उस दिन सुन ने को तुम्हे फ़िर अपनी किस्मत पे क्यों ना इतराऊं मैं मैं तुम्हे बस रात भर देखती रहू तुम्हारी आँखों में हर पल और ज्यादा डूबती रहू तुम्हारे बातें सुन बज उठे है सारे एहसास उस एहसास मै रात भर क्यों ना रहू मैं और भी क्या जाने हर पल सोचती हु मैं क्यों दीवानी की तरह तुम्हे चाहती हु मैं जानती हु ये सब कभी मुमकिन नही पर फ़िर भी ख्वाहिश है कुछ यु तुजसे मिलु कभी मैं ..पलक…

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