गर ये आँखें किसीकी शिफारिश ना करती !!

eyes
गर ये आँखें किसी की सिफारिश न करती…
दिलों से दिलों की पहेचान होती, और मोहब्बत इतनी आसन न होती… गर ये आँखें किसी की सिफारिश न करती.. उल्फत-ऐ – मोहब्बत किसी के दीदार से न बढती, दर्द की परिभाषा यूँ रोज़ न बदलती… गर ये आँखें किसी की सिफारिश न करती.. हुस्न और इश्क की न कोई जंग होती, “Love @ first sight ” की स्टोरी भी न बनती… गर ये आँखें किसी की सिफारिश न करती..

    ~~~~~~~~~~~~पूर्वी~~~~~~~~~~~

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