तेरा ख़त आखरी ख़त ना होता…..

काश…… वो तेरा आखिरी ख़त आखिरी ना होता भूला नही है तु मुझे ये एहसास तो रहता में तनहा तो होती मगर इतनी भी ना होती हर ख़त तेरा वजूद बनकर मेरे पास तो होता शायद मेरी महोब्बत में अब कोई असर ना रहा अब ना होती होंगी तेरी आखें नम मेरे लिए शायद तेरे दिल में मेरी यादों का बसर ना रहा अब ना उठते होंगे तेरे हाथ मेरे लिए लेकीन लग रहा है मुजको आज दिल की बातो से जैसे कर रहा है तु बस अभी याद मुझे लिख रहा है ख़त कोई अपने हाथो जो आके मिलेगा बस चंद रोज़ के बाद मुझे सुबह गुजर जायेगी शाम के इंतजार में और शाम नई सुबह के इंतजार में गुजर जायेगी जिन्दगी गुजर जायेगी तेरे पैगाम के इंतजार में उस के बाद क्या होगा बस मौत चली आएगी इस आस में चली जाउंगी में ये जहाँ छोड़ कर की शायद मेरे मरना ही कुछ काम आएगा शायद चला आए तु उस पल मेरे पास दौड़ कर जिस पल तेरे पास मेरी मौत का पैगाम आयेगा काश ….. तेरा ख़त आखरी ख़त ना होता…

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