प्यार इस दुनिया मैं भी था

नफरत पल रही है पुरी देखरेख के साथ …और प्यार बेचारा यतीम सा ख़ुद ही पल रहा है … इसकी सूरत पर सबने अच्चा नकाब है पहनाया …. प्यार का बिगड़ता रूप मेरा जी जलाता है … शुक्रिया उसका जिसने बाना छोड़ा एक ताज महल … प्यार इस दुनिया मैं भी था पता चलता है …….पलक

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