प्यार की रस्म

बैठे रहो मेरे पास ना जाओ कंही आज इन आखरी पलो का साथ तुम्हारी सांसो का एहसास जी लेने दो अपना यह प्यार फिर बिखर जायगी,इक काली रात ना छोडो मेरा हाथ कुछ पल बाद आप छुट जाएगा साथ बह जाने दो अपने ज़सबातो को फिर कौन सुनेगा, मेरे जाने के बाद ऐसे ना छुपाओ अपनी भीगी पालकी ना पौछेंगा कोई, मेरे बाद देखो उस चाँद को, वो सब जानता है कैसे हममे जुदा होते, तक रहा है जब आयेगी तुम्हे मेरी याद तुम भी ऐसे ही चाँद को तकना मैं काले अम्बर पर भागती आऊंगी हवा बन तुमसे लिपट जाउंगी अपने प्यार की रस्म मरकर भी निभाउंगी……………….

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