दूरियाँ

Hindi Poems

कुछ दूरियाँ है हमारे तुम्हारे बीच , कुछ पलों की, कुछ ख़यालों की , कुछ बातों की , कुछ सवालों की, फिर भी हम अजनबी नही ऐसा क्यों? कुछ तो है … न जाने कुछ तो है …कुछ तो है…… पलक ….

kaash wo tera aakhiri khat aakhiri na hota

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kaash wo tera aakhiri khat aakhiri na hota bhoola nahi hai tu mujhe ye ehsaas to rehta main tanha to hoti magar itna bhi na hoti har khat tera wajood banke mere paas to rehta shayad meri mohabbat me ab koi asar na raha ab na hoti hongi teri aakhein nam mere liye shayad tere dil me meri yaadon ka basar na raha ab na uthaa te honge tere haath kalam mere liye lekin lag raha hai mujhko aaj dil ki baaton se jaise kar raha hai tu bas abhi yaad mujhe likh raha hai khat koi apne haaton se jo aake milga bas chand roz ke baad mujhe subah guzar jaayegi shaam ke intezaar mein aur shaam nayi subah ke intezaar me guzar jaayegi zindagi guzar jaayegi tere paigaam ke intezaar mein us ke baad kya hoga bas maut chali aayegi is aas me chali jaaungi main ye jahan chhodkar ki shayad mera marna hi kuchh kaam aayega shayad chala aaye tu us pal mere paas daudkar jis pal tere paas meri maut ka paigaam aayega kaash ……….. tera khat akhari khat na hota

*****Palak*****

Tides Of Emotions

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रंग मैंने देखे नही… तेरी तस्वीर की बात कुछ और है… एक गूँज जो कानो मैं आज भी गूंजती है… इकरार की बात कुछ और है… जीवन का सूरज डूबे तो क्या… अंधेरे में चाँदनी की बात कुछ और है… दुःख दर्द का मुझे मालूम ना था… आँखों आसू बनके छाए हो तुम, यह बात कुछ और है… रेत पे लिखा एक नाम तो क्या… हवा की मुझसे दुश्मनी थी, यह बात कुछ और है… दिन-दहाड़े किसे ढूँढती हैं… आँखों मैं छाए हो बस तुम यह बात कुछ और है…

 

पलक

यादे…

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कुछ नम लम्हों की मुस्कुराती यादे उन खामोश लम्हों की बोलती यादे  

दिन मैं तेरे नूर से रोशन यादे शाम की लाली से बुजी बुजी वो यादे  

वो समंदर की गेली रेत पैर संग तेरे चलना अज सागर की लहर ने मिटा ली वो यादे  

बरसात की बूंदों मैं हमारा यु गुम होना वही बूंदें आज असू बन कर आती है यादों मैं  

तेरे संग रातों मैं चाँद को ताकते रहना बिखर कर अब तो तारे हो गई वो यादे  

जिस सफर मैं दो पल का हम सफर था वो उस राह पैर खड़ी अकेली वो यादे  

जिस को एक पल के लिए ना भूल सके हम उन के लिए बस बुन कर रह गई वो यादे ….

…पलक…

कभी यु तो हो …

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कभी यु भी तो हो ………. दरिया का साहिल हो , पूरे चाँद की रात हो , और तुम आओ ….! कभी यु भी तो हो ….. परियों की महफिल हो , कोई तुम्हारी बात हो , और तुम आओ …..! कभी यु भी तो हो ….. ये नर्म मुलायम ठंडी हवाएं , जब घर से तुम्हारें गुज़रे , तुम्हारी खुशबू चुरा ले मेरे घर आयें , और तुम आओ …..!   कभी यु भी तो हो …… सुनी हर मंजिल हो , कोई ना मेरे साथ हो , और तुम आओ …..! कभी यु भी तो हो …… ये बादल ऐसा टूट के बरसे , मेरे दिल की तरहा मिलने को तुम्हारा दिल भी तरसे , तुम निकालो घर से और वापिस ना जा पाओ , कभी यु भी तो हों ….. तन्हाई हो , बूंदे हो , बरसात हो और तुम आओ , और कभी वापिसना जाओ …… कभी यु भी तो हों ……… पलक …….

एक ख्वाब

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आ असमान से नीद का सौदा करे, एक ख्वाब दे एक ख्वाब ले… एक ख्वाब जो आखों मैं है , आ उसको पुरा करे …. शर्म को तेरी आगोश मैं पिघलने भी दे … बोलके हल्के हल्के कानो मैं मेरे सांसों को उलझा दे मेरी सांसों से दो लफ्ज़ थे ..एक बात थी.. उमर लगी तेरी खामोशियों को बोलने मैं … सौ साल का वो एक पल था .. उस पल मैं पुरी सदियाँ बिता दें …. आ असमान का चाँद से सौदा करे रोशनी से भर दे अपना जहाँ …. पलक …..

Teri yadoon ki mehak

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Teri yadoon ki mehak, sath liye akser hum , door khuwaboo ke jazeeray main uter jatey hain, kyun ki main janti hu, hum aur tum sirf khuwaboo main he mil saktey hain, maine socha hai is baar tumharay humraah, aik aisi jaga utroongi, aur tumhay apnay paas bitha ker, aankho main aakhain daal ker, bari himmat ker ke tum say keh dungi, Ke tum meray ho Tum jo chahho to, meri is muhabbat ko sahara de do, zindagi yu to bohut thori hai muhabbat ke liye tum jitna bhi pyaar mujhay dey sako sara dey do, kuch to bolo, kuch to bolo tum, kahin aisa na ho ke sehar hotay he hum wapis us dunya mian laut jaye
bus yehi chand khayalat liye teri yadoon ki mehak sath liye
Aksar …… hum aise miltay hai
******Palak*****

ख्वाहिश है कुछ यु तुज से मिलु कभी

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ख्वाहिश है कुछ यु तुज से मिलु कभी मैं हो सारी दुनिया सोई ..बस जगे हो तुम और मैं फर्क क्या मुझे हो जो उस रात ना निकले चाँद दिखता हैं यु भी तेरा चेहरा चाँद मैं मुझे तुम धीरे से कुछ कहते कहते रुक जाओ और फिर रात से कहो एक पल के लिए थम जाओ वक्त भी थम जाए उस दिन सुन ने को तुम्हे फ़िर अपनी किस्मत पे क्यों ना इतराऊं मैं मैं तुम्हे बस रात भर देखती रहू तुम्हारी आँखों में हर पल और ज्यादा डूबती रहू तुम्हारे बातें सुन बज उठे है सारे एहसास उस एहसास मै रात भर क्यों ना रहू मैं और भी क्या जाने हर पल सोचती हु मैं क्यों दीवानी की तरह तुम्हे चाहती हु मैं जानती हु ये सब कभी मुमकिन नही पर फ़िर भी ख्वाहिश है कुछ यु तुजसे मिलु कभी मैं ..पलक…

हमे प्यार चाहिए था….

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हमे प्यार चाहिए था …. किसी भी कीमत पर ….. हमने इस लिए बेवाफईयो से प्यार किया……. अब तूतेगा……. तब टूटेगा…….. इसकी ख़बर हमे…….. दिलको बिखरने को हर पल तैयार किया……… दिल के कारन हम हुए गयल कितनी ………… ऐसा इसका सौदा हमने तो पहली बार किया …पलक …..

मगर कभी कभी …..

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तू हर दिल मैं है उनकी आरजू बन कर

काश तू बनाये मुजे अपनी आरजू कभी कभी तू लगती है फूलो मैं घुली ख्श्बू की तरह काश मेरे खयालों से तू नहाये कभी कभी तू क्या है …..! तू कौन है ……! ऐ दूर के सनम …….! बताया करुगा तुजे कभी कभी मेरी जिन्दगी खुदा की नही तेरी है नेय्मत ये कहने का गुनाह भी करुगा मगर कभी कभी ……….पलक ……