પલક….

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પલક ઝપકી, ‘ને એક પ્રકાશ રેલાયો વીશ્વમાં. પલક ઝપકી, ‘ને બ્રહ્માંડ રચાયું ઘોર અન્ધકારમાં. પલક ઝપકી, ‘ને જીવાંકુર ફુટ્યું આ ધરણીમાં. પલક ઝપકી, ‘ને જીવન મહેંક્યું અફાટ સંસારમાં. પલક ઝપકી, ‘ને બે જીવ મળ્યાં અણદીઠેથી. પલક ઝપકી, ‘ને બે આત્મા એક થયાં તૃપ્તીથી. પલક ઝપકી, ‘ને એક શ્વાસ વધ્યો જીન્દગીમાં. પલક ઝપકી, ‘ને સ્નેહતણો રણકાર થયો દીલમાં. પલક ઝપકી, ‘ને રસહીન થયો આ સંસાર. પલક ઝપકી, ‘ને પ્રભુમીલન થયું જે નથી અસાર।  

Palak

यूँ जमाने मैं क्या नही होता

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यूँ जमाने मैं क्या नही होता, बस तू ही मेहरबा नही होता ,  

वो ही मिलना , वो ही हसना , वो ही बातें करना , दिन मैं कुछ भी नया नही होता ,  

यूँ तो सिर्फ़ होती हैं तुजे सारे जमाने की ख़बर , सिर्फ़ इस दिल का पता नही होता ,  

जुकती पलके तेरी चाहत की ख़बर देती हैं , इश्क फ़िर क्यों जावा नही होता ,  

कहना ग़र मुस्किल हैं लब से, तो कोई बात नही , आखों से क्या क्या बयां नही होता ,  

ऐसी देरी भी मुनासिब नही उल्फत के खेल मैं , वक्त का कुछ गुमा नही होता …..!!!!!!!!!!  

पलक

Kuch Sawal

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Apani hi umiid ke daayarein Mein qaid; “ main aur mere” ke chakrawat mein ulaze Kuch kamjor dhaagon ko , Riston ka naam kaise de ?? Mukhaute ke piche Chupe Us chhaal bhare chehare ki Sacchai ko Acchai ka naam kaise de ?? Naa iname koi apanepan ki namie Naa koi sacchai ki puravayee Gilee mitti se bane In rishton ke khali baratano ko Tootane se bachaye kaise koi ??

~~~~यादे, बस यादे ~~~~~

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कदम रुक जाते हे कई बार पलट कर जब हम बीते लम्हों को टटोलते हे, यही तो तुम खड़े थे वो कम शक्कर की चाय के कप पर वो बरसती शाम की बूंदों पर तुमने मुझे पास बुला कर कहा था की “तुम्हारे बिना जिया नही जाता” वो बूंदे गवाह थी, तुम्हारे इज़हार की वो गवाह वक्त के साथ सूख गए पर यादे….. वो वही उसी कमरे में खिड़की पर तुमसे छुट गई चाय का कप तो धुल गया पर उस मे जमी तुम्हारी खुशबू मिट नही पाई… आज भी बारिश बहुत तेज हे खुली खिड़की की आवाज़.. लगता हे तुम्हे बुला रही हे कदम रुक जाते हे कई बार पलट कर जब हम बीते लम्हों को टटोलते हे..

 

 

palak

एक सपना ..!!

Hindi Poems

बालों में उलझती, खुद उलजाती …. तेरे चेहरे पे सरसराती …. मेरी उंगलिया होठों पर रुक जातीं …. कान मॆ धीमे से गुनगुनातीं ….. अधखुली अधजगी आखॊ में ….. अनगिनत सपने लिए ….. तेरे बदन की खुशबू को …. अपनी रूह में बसाती ….. कुछ सिमट-सिकुड कर ….. तेरी बाहॊ में टूट जाती …. काश ऐसा हो पाता …. तू मेरा और मैं तेरी हो पाती …. पलक ….

अजनबी आखों से छलका है प्यार पहली दफा

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अजनबी आखों से छलका है प्यार पहली दफा एक उम्मीद जगी है की अब मिलेगी वफ़ा मैंने रातो मई गिराएँ है जो असू अक्सर उसी शबनम से खिल उठी है आज मेरी सबा सब ने मातम ही मनाये है मेरे जीने पर वो दुआ मागेगी मेरे लिए क्यों ऐसे लगा.? मेरी हर बात का दुनिया मलाल करती है मेरा हर रंज उठाएगी वो ना होगी खफा बस यही जरा सा सताए खोफ है मुझे कही औरो की तरह वो भी ना दे जाए दगा मुझे … पलक

Pondering ……!!!!

English Poems

My life… I am WONDERING………….. Things are getting more and more complicated…. every little things had become so demanding….. sometimes i ask myself … why i am working so hard for…. in the end what am i trying to achieve in my life?a husband? then a house….. then a loan…..then a car…. then a family….then…kids…then education…and the list just goes on and on and on………. in the end, what do i leave for myself??? what happen to the money i earn? where is my time to do something that i really enjoyed? but… if i meet someone…. that very special someone….. won’t i wanna be with him together forever? and have a house so that the two of us can have the cosy little space to spend time together…… don’t u wanna bring him out in a cofortable car so as to avoid the public transport or to wait for taxi under the rain…… the list goes……………on on on on on ……………..and on on on on……so life is so sweet isn’t? just look at it from another angle or perspective, u will find….. at the other side of each story….. there is always some other thing to ponder about…..