एक सपना ..!!

Hindi Poems

बालों में उलझती, खुद उलजाती …. तेरे चेहरे पे सरसराती …. मेरी उंगलिया होठों पर रुक जातीं …. कान मॆ धीमे से गुनगुनातीं ….. अधखुली अधजगी आखॊ में ….. अनगिनत सपने लिए ….. तेरे बदन की खुशबू को …. अपनी रूह में बसाती ….. कुछ सिमट-सिकुड कर ….. तेरी बाहॊ में टूट जाती …. काश ऐसा हो पाता …. तू मेरा और मैं तेरी हो पाती …. पलक ….

Some pages of my diary ……..

Hindi Poems

August 25, 2006 (16:23:25) Wo keh gaye hum se, abke wo humse khwabon mein milenge Koi jaa kar kah de unhe, ki wo aane ka waada to kare, hum hamesha ke liye so jaayen August 26, 2006 (15:36:25) Kashish ki nahin alfaaz ki, chahat ko to jarurat hai bus ehsaas ki Paas hote to manzar hi kya hota, door se khabar hai hamen aapki har saans ki August 30, 2006 (22:38:04) Tara vina mane akeladu lagay. Hu tane anant prem karu chu. Jivensangini hu tari bani ne rahesh tari sada. September 1, 2006 (22:21:04) Main ye soch kar uske dar se utha tha, Ki wo roke legi mana legi mujhko. Kadam aise andaaz se uth rahe the, Ki awaz deke bula legi mujhko. Magar usne roka na wapas bulaya, Na awaz hi di na… Main aahishta aahishta badhta hi aaya, Yahan tak ki usse juda ho gaya main, Juda ho gaya……. September 2, 2006 (16:30:29) Ye kis tarah yaad aa rahe ho, Ankhen band hai fir bhi nazar aa rahe ho. Naa jaane kyon aisa lagta hai, Wo haqeeqat thi aur ye sapna. September 2, 2006 (18:54:42) Khali haath shaam aayi hai, Khali haath jaayegi. Aaj bhi naa aaya koi, Khaali haath laut jaayegi… September 3, 2006 (10:33:05) Pyar ka anjaam kisne socha Hum to mohabbat kiye jaa rahe hain. Deewane hum to hain unke sanam, Bus unka naa liye jiye jaa rahe hain. September 3, 2006 (20:19:34) Pyaar ki jab koi baat chali, tum yaad aaye Jab sinduri saanjh dali, tum yaad aaye. September 3, 2006 (23:31:28) Intezaar ki ghadiyan bahut kathin hoti hain. Kitni baar uth ke darwaaja khola aur band kiya. Aankhen mundi fir khol di aur jab thak gaya, waqt guzar gaya to chirag madham kar diye. Fir kisi hawa ke jhonke ne darwaaje par dastak di. Par Jaanta tha, itni raat ko koi nahin aata par ummeed hai ki baaz nahin aati.

एक रात….!!!!

Hindi Poems

वो केह कर चले इतनी मुलाकात बहुत है मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है  

आसु मेरे थम जाए तो फ़िर शोख से जाना ऐसे मैं कहाँ जाओगे के बरसात बहुत है  

वो कहने लगे जाना मेरा बहुत है जरुरी नही चाहता दिल तोडू तेरा पर है मज़बूरी
गर हो गई हो कोई खता तो कर देना माफ़

 

मैंने कहा हो जाओ अब चुप करो इतनी भी बात बहुत है
समज गई हु सब और कुछ कहना जरुरी नही बस आज की रात रुक जाओ ,जाना इतना भी नही जरुरी..

 

फ़िर कभी ना आउंगी तुम्हारी जिन्दगी मैं लौट कर सारी उमर जीने के लिए आज की रात बहुत है …. बस आज की रात .. रुक जाओ ….

This poem is one of my favourite poem.. thats why i post here. hope u all like it ..whenever i read this poem in my diary i read again and again.

palak

बाबुल!!!

Hindi Poems

छलके है आँखें, तरसे है मन ये, रुकी हुई है धड़कन, रुकी रुकी साँसें डगमगा रही हूँ मैं फिर चलते चलते, मुझे थामा था मेरे बचपन मे जैसे, गुडिया को अपनी अपना हाथ फिर थमा दे बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले  

वो आँगन का झूला क्या अब भी पड़ा है वो तुलसी का पौधा क्या अब भी खड़ा है वो स्तरंगी छतरी, वो बारिश का मौसम, काग़ज़ की कश्ती फिर मेरे लिये एक बना दे एक बार मुझको फिर से वो बचपन लौटा दे बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले  

वो गुडिया की कंघी, वो खेल खिलौने, वो मेरा तकिया और वो मेरे बिछौने, मेरी कुछ किताबें थी, कुछ अधूरे सपने, सपने वो मुझको एक बार फिर से लौटा दे या सामान मेरा गंगा मे बहा दे… बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले  

कैसे ज़िगर के टुकड़े को कर दिया तूने पराया, डोली के वक़्त तूने जब कलेज़े से लगाया, मैने सुना था बाबुल तेरा दिल रो रहा था, कैसे रोते दिल को तूने फिर था मनाया बाबुल वैसे ही दिल को एक बार फिर तू मना ले बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले  

लगी थरथराने जब लौ ज़िन्दगी की, मैने लाख तुझको दिये थे इशारे, माँ को भेजी थी ख़त मे एक कली मुरझाई, भेजी ना राखी, छोड़ दी भाई की सूनी कलाई मगर बेटी तुम्हारी हो चुकी थी पराई, शायद नसीब अपना समझा ना पाई, आखिरी बार मेरी आज तुम फिर कर दो विदाई लेकिन विदाई से पहले अपनी नज़र मे बसा ले बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले  

मुझे ख़ाक करने को चला था जब ज़माना, क्यों रोए थे तुम भी, मुझे ये बताना, आँखों मे अब ना आँसू फिर कभी लाना भटक रही है रूह मेरी, तेरे प्यार को फिर से माथे पे हाथ रख कर मेरी रूह को सुला दे बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले ॥

पलक …

ये कविता मैंने कही पढ़ी थी इस लिए मैं इसे यहाँ रख रही हु ..

एक यही ख्वाहिश

Hindi Poems

वक्त रुक जाए उस वक्त जब आप साथ हों

दूर तलक हों चंदा की चादनी और हाथों मैं उनके मेरा हाथ हों

बस एक यही ख्वाहिश है

जी भर सजाऊँ आखो मैं सपने

आप हों कुछ करीब अपने

हवाओं का जोंका कुछ खाश हों

बस एक यही ख्वाहिश है

ना कुछ कहे वो न लब मेरे कुछ बयां करे

हों कभी हम जुदा ऐसे खुदा ना करें

दिल मैं उनके भी मेरे जैसे कुछ जस्बात हों

बस एक यही ख्वाहिश है

हम जी भर कर उन्हे प्यार करें

सब कुछ उन पर निसार करें

बस वही मेरे हर गम हर खुशी के राजदार हों

बस एक यही ख्वाहिश है

Untouched

Hindi Poems

रोक दू इस जहाँ को, अगर बस चले मेरा, और रोक दू इस शाम को, कभी ना आने दू वोह सवेरा.
एक अनछुआ सा नाम …

ऐ हवा तुझे नही आजादी, और नही मेरी इजाज़त, बह जाए ना यह रूहानी खुशबू, कुछ ऐसे है उनकी आहट. थम जा ऐ समां, की आज मैं उनके साथ नही, बीते हुए लम्हों मैं जी लुंगी, बिरह का मुझे एहसास नही. तेरा आज मैं नही अगर, मुकद्दरों से यह एलान है, जहाँ-ऐ-गुमनाम तुम याद रखना, माथे पे लिखा सिर्फ़ तेरा नाम है।

पलक

कैसे बयां करू उस लम्हे को ……

Hindi Poems

कैसे बयां करू उस लम्हे को बस शब्दों मैं …? जैसे सुखी धरती पैर हो सावन की पहली बोछार जैसे सूरज की किरण आई हो कमरे मैं पहली बार जैसे अच् उठी हो गोरी कलाई चूडियों की जनक से जैसे दुल्हन का रूम निखर उठे कर के साजन का दीदार और कैसे बयां करू उस लम्हे को जब छुआ था तुम्हारे होठो ने मेरे ओठो को पहली बार… पलक ….

महोब्बत की है….!

Hindi Poems

तू मेरे पास नही है फ़िर भी तेरी याद ये महोब्बत की है
तेरे एहसास से महोब्बत की है

 

मैं तुम को किस तरह भूल सकती हु

मैंने तेरे वजूद से महोब्बत की है
कभी तो तुने भी मुझे याद किया होगा
मैंने उन लम्हात से महोबत की है
जिस मै हो सिर्फ़ तेरी और मेरी बाते
मैंने उस जिन्दगी से महोब्बत की है
और जो महकते हो तेरी ही महोबत से मैंने उन जस्बात से महोबत की है
तुजसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैने उस इंतज़ार से महोब्बत की है …

……..PALAK…….

प्यार इस दुनिया मैं भी था

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नफरत पल रही है पुरी देखरेख के साथ …और प्यार बेचारा यतीम सा ख़ुद ही पल रहा है … इसकी सूरत पर सबने अच्चा नकाब है पहनाया …. प्यार का बिगड़ता रूप मेरा जी जलाता है … शुक्रिया उसका जिसने बाना छोड़ा एक ताज महल … प्यार इस दुनिया मैं भी था पता चलता है …….पलक

खामोशियाँ

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खामोशियाँ है तो खामोश पर एक अनसुनी ज़बान में हर बात बोलती है , यह आँखें इसका साथ देती है और हर राज खोलती है , हम हर बार यह चाहतें है की किसी को सुनाई ना दे यह पर यह है की हर वक़्त मेरी तनहाइयों में चली आती है और कहती है वो बात जो दुनिया के शोर मे खो जाती है . बस खो जाती है …… palak