इक कहानी

Poems

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चलो सुनाउ इक कहानी , इस मे है न राजा न रानी
चुलबुली सी थी इक चिडिया , नाम था जिसका “मुन्नी रानी”

छोटी सी चिडिया थी लेकिन, बातों मे थी बड़ी सयानि
रोज रोज वोह बुनती थी खाव्ब , नील गगन को छू लेने के

हवाओं संग गाती थी गाना, चुन चुन कर लाती वो दाना
बस थी उस मे इक खराबी, कभी न सुनती वोह बात किसीकी

मम्मी उसकी हमेशा कहती मुन्नी न करना कुछ भी नादानी
इक दिन किसी परबत पर जाने की, बात उसने मन मे ठानी

मम्मी – डेडी को बिन पूछे, निकल पड़ी करने मन मानी
उड़ती चली परबत की और न लिया संग दाना-पानी

भूख-प्यास के मारे हो रही थी वोह पानी -पानी
किस से मांगू अब में दाना, सोच रही थी मुन्नी रानी

उड़ते उड़ते जा वोह पहोंची जहा थी इक बगिया सुहानी
बच्चे खेल रहे थे जहाँ पे इक दुसरे को दे के ताली

थकी हारी मुन्नी रानी ढूंढ़ रही थी दाना पानी
नन्हे से बच्चे “राजू” की, नज़रों मई मुन्नी तब आई

छोटी सी चिडिया को देखने, उसने अपनी मम्मी बुलाई
राजू की इक पुकार पर मम्मी वहां दौडती आई

मुन्नी को ऐसे हाल मे देखकर आँख उसकी पानी से भर आई
मुन्नी को लेकर हाथों में , थोड़ा सा छिड़का पानी

पानी की चंद बूंदों से, मुन्नी में थोडी जान आई
राजू ने मुन्नी को घर लेजाने की मम्मी को बात बताई

मम्मी ने राजू को समजाया, ” मुन्नी को वापस घर भी है जाना “
मम्मी की वोह बात सुनकर, राजू ने न की आना-कानी
राजू की ऐसी देख समजदारी, मुन्नी मन में बहोत पछताई
काश में भी सुनती मम्मी का कहा, आज यह नौबत ना थी आनी
अब न करूंगी कुछ नादानी, मुन्नी ने ली मन में ठानी
अपनी मम्मी के पास जाने, घर की और चल पड़ी मुन्नी,
घर पहोंच कर मुन्नी ने, मम्मी को सारी बात सुनाई
“मम्मी अब न करूंगी नादानी, न कोई करुँगी कोई मन-मानी”
गले लगाकर मम्मी बोली : “मुन्नी अब तू हो गई सच में सयानि “
मुन्नी बन गई सच में सायानी, और खत्म हूवी कहानी,
चलो सुनाउ इक कहानी , इस में है न राजा न रानी

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जिंदगी

Poems

रोज़ सुबह होती है, शाम होती है,
जिंदगी कतरा कतरा यूँही तमाम होती है,
आवाज़ तो आती है दिल के धड़क ने की मगर
किसे मालूम के उसमे धड़कन कहाँ होती है?
~~~~~~~~~~~~~~~पूर्वी~~~~~~~~~~~~

पल – दो पल

purvi-ekghazal


पल -दो पल आज कुछ ऐसे ठहर जाए..
गुज़रा तेरे साथ हर लम्हा

इस पल -दो पल मई समां जाए….

न करेंगे गीला कभी तेरे पास न होने का…..
बस इतनी गुजारिश है तुमसे ॥

तू आज पल दो पल ठहर जाए…

उल्फत -ऐ मोहोब्बत

purvi-ekghazal

कहना चाहती हूँ बहोत कुछ और

लब्ज़ नही है होठों पे


दिल की सौगात देने चली हूँ और

दिल ही नही है सिने मे


ख्वाब देने लगे है दस्तक और

नींद नही है आंखों मे

बढ़ने लगी है उल्ज़न-ऐ मोहोब्बत और

करार नही है जीने मे

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मेरी पहेचान

Purvi

न पूछो मुझसे मेरे होने की पहेचान
बाकि नही है मुज मे कुछ मेरा कहने को

दिल की हर धड़कन पे बस उसीका नाम है
दिल के सारे आरमान बस उसीके नाम

मन मई मचलती आरजू लेती उसकी नाम है
मन की हर कल्पना मई वोही सुबह-शाम ही

कहने को तो मे आज भी जिन्दा हूँ लेकिन
जिस्म -ओ -जान को भी उसी पे किया कुर्बान है…

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Ek Ghazal

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Ghazal Hoon mai tere Pyar ki.. Bas Pyar se Gungunana… Nikhri hoon tere Payr mai Bas pyar se Sajana… Nasha hai muj mai Teri Baton ka Muje pyar se Pilana… Khusboo hai muj mai Tere Khayalon ki Muje Pyar se Mahkana… Ummid hai muje Tere Pyar ki Muje Pyar se hi Chahna… Samaj sako ek “Ghazal” ko. zara muje bhi Samjana ~Purvi~

जी नही करता

purvi-ekghazal

बहोत पी है तेरी आंखों से हमने,

मयखाने पर जाने को अब जी नही करता…

देखि है लाली तेरे सूर्ख लबों पे अक्सर,
उगते सूरज का नज़ारा करने को अब जी नही करता…

महेका है मेरा आशियाना तेरी हसीन यादों से,
फूलों से उसे सजाने को अब जी नही करता…

मिली है तन्हाई मुझे तेरे प्यार की सौगात मे,
किसी और से दिल लगाने को अब जी नही करता…

लम्हा-लम्हा करता हूँ बस तेरा ही इंतजार,
इस कदर पल -पल मरने को अब जी नही करता…

कब सोचा था.

purvi-ekghazal













कब सोचा था ज़िन्दगी की राह मे,
ऐसे भी मोड़ आयेंगे।

साथ चलने का वादा करके वो
अलग राह पर मूड जायेंगे ॥

धड़कन थे जो दिल की कभी ।
दिल ऐसे तोड़ जायेंगे॥

जुदा न होते थे एक पल जो।
यूँ ठुकराके चले जायेंगे॥

संग भुने ख्वाबों से जो ।
युंह मुह फेर जायेंगे॥

पल पल मुझे हँसाने वाले ।
आज ऐसे भी रुलायेंगे ॥

अपनों से भी अपने थे जो।
युंह अजनबी बन जायेंगे ॥

कब सोचा था ज़िन्दगी की राह मे,
ऐसे भी मोड़ आयेंगे।

कतरा कतरा मर के भी हम
जिन्दा ही कहलायेंगे ॥

~~~~~~~~~~~~~~पूर्वी~~~~~~~~