खामोश नगमे ….!!!!!!

कभी गुल ने बुलबुल ने कहा …..
मेरी खामोशी तेरे हज़ार गीतों का जवाब है …
बुलबुल ने कहा ….
मैने तेरे ही एहसासों को आवाज़ दी ….
तुने कभी सोचा, मेरे उन नगमो का क्या हुआ …
जो कहे .. न कहे .. कभी लबो तलक आके रह गए …

पलक ……

कभी गुल ने बुलबुल ने कहा …..
मेरी खामोशी तेरे हज़ार गीतों का जवाब है …
बुलबुल ने कहा ….
मैने तेरे ही एहसासों को आवाज़ दी ….
तुने कभी सोचा, मेरे उन नगमो का क्या हुआ …
जो कहे .. न कहे .. कभी लबो तलक आके रह गए …

पलक ……

आप कहे तो हसरते बयां कर दू
आप बैठे रहे और मै ग़ज़ल पुरी कर लू
आप का साथ मिले तो ख़ुद पर एतबार कर लू
खामोशियाँ आबाद रहे , नजरों को जुबान दे दू ,
जींदगी लम्हा लम्हा दर्द सही
अब यादों के सहारे सफर खुसनुवार कर दू
चाँद तारों तो क्या दमन मैं कायनात भर लू
आप के वादे पर ये उमर तमाम कर लू
गुल खिले अ खिले अब ख्वाबों से निकाह कर लू
आप का साथ हो तो ये मंजिले रेहुजर कर लू…..


पलक

आप कहे तो हसरते बयां कर दू
आप बैठे रहे और मै ग़ज़ल पुरी कर लू
आप का साथ मिले तो ख़ुद पर एतबार कर लू
खामोशियाँ आबाद रहे , नजरों को जुबान दे दू ,
जींदगी लम्हा लम्हा दर्द सही
अब यादों के सहारे सफर खुसनुवार कर दू
चाँद तारों तो क्या दमन मैं कायनात भर लू
आप के वादे पर ये उमर तमाम कर लू
गुल खिले अ खिले अब ख्वाबों से निकाह कर लू
आप का साथ हो तो ये मंजिले रेहुजर कर लू…..


पलक

Pondering ……!!!!

My life…
I am WONDERING…………..
Things are getting more and more complicated…. every little things had become so demanding….. sometimes i ask myself … why i am working so hard for….
in the end what am i trying to achieve in my life?a husband?
then a house…..
then a loan…..then a car…. then a family….then…kids…then education…and the list just goes on and on and on……….
in the end, what do i leave for myself???
what happen to the money i earn?
where is my time to do something that i really enjoyed?
but…
if i meet someone…. that very special someone….. won’t i wanna be with him together forever? and have a house so that the two of us can have the cosy little space to spend time together…… don’t u wanna bring him out in a cofortable car so as to avoid the public transport or to wait for taxi under the rain…… the list goes……………on on on on on ……………..and on on on on……so life is so sweet isn’t? just look at it from another angle or perspective, u will find….. at the other side of each story…..
there is always some other thing to ponder about…..

My life…
I am WONDERING…………..
Things are getting more and more complicated…. every little things had become so demanding….. sometimes i ask myself … why i am working so hard for….
in the end what am i trying to achieve in my life?a husband?
then a house…..
then a loan…..then a car…. then a family….then…kids…then education…and the list just goes on and on and on……….
in the end, what do i leave for myself???
what happen to the money i earn?
where is my time to do something that i really enjoyed?
but…
if i meet someone…. that very special someone….. won’t i wanna be with him together forever? and have a house so that the two of us can have the cosy little space to spend time together…… don’t u wanna bring him out in a cofortable car so as to avoid the public transport or to wait for taxi under the rain…… the list goes……………on on on on on ……………..and on on on on……so life is so sweet isn’t? just look at it from another angle or perspective, u will find….. at the other side of each story…..
there is always some other thing to ponder about…..

अजमाइश

तुम को पाने की ख्वाहिश मैं,
उम्र उजर दी अजमाइश मैं ,
ना तुम मिले , ना करार आया ,
हां, ख़ुद को पा लिया ,
तुम्हारी पैमाइश मैं …..
तुम को पाने की ख्वाहिश मैं,
उम्र उजर दी अजमाइश मैं ,
ना तुम मिले , ना करार आया ,
हां, ख़ुद को पा लिया ,
तुम्हारी पैमाइश मैं …..

यादो के बहाव में बह जाना याद है

छोटी छोटी बातों पे मुस्कुराना याद है
पतझड़ मैं भी लगता था मौसम बहारों का
तुम्हारे इंतज़ार मैं वक्त बिताना याद है
कभी साथ बैठे बैठे युही वक्त बिता देना
कभी मेरी हर बात पर तुम्हारा मुस्कुराना याद है
कभी बिन बताये तुम्हारा सब कुछ कह देना
कभी कह के भी बात छुपाना याद है
कुछ सुन ना चाहते थे हम तुमसे
पर तुम्हारा न कह पाना याद है
अभी तो मिले भी नही थे रास्ते हमारे
यूँ एक मोड़ पर राहों का मुड़ जाना याद है
चाहा था एक कहानी बने हमारी
मगर पन्नो का अचानक बिखर जाना याद है
कहाँनी न सही अफसाना तो बन गया
इस अफ़साने का हर फ़साना मुझे याद है

from :- khwabon ki nagariya

यादो के बहाव में बह जाना याद है

छोटी छोटी बातों पे मुस्कुराना याद है
पतझड़ मैं भी लगता था मौसम बहारों का
तुम्हारे इंतज़ार मैं वक्त बिताना याद है
कभी साथ बैठे बैठे युही वक्त बिता देना
कभी मेरी हर बात पर तुम्हारा मुस्कुराना याद है
कभी बिन बताये तुम्हारा सब कुछ कह देना
कभी कह के भी बात छुपाना याद है
कुछ सुन ना चाहते थे हम तुमसे
पर तुम्हारा न कह पाना याद है
अभी तो मिले भी नही थे रास्ते हमारे
यूँ एक मोड़ पर राहों का मुड़ जाना याद है
चाहा था एक कहानी बने हमारी
मगर पन्नो का अचानक बिखर जाना याद है
कहाँनी न सही अफसाना तो बन गया
इस अफ़साने का हर फ़साना मुझे याद है

from :- khwabon ki nagariya