प्यार इस दुनिया मैं भी था

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नफरत पल रही है पुरी देखरेख के साथ …और प्यार बेचारा यतीम सा ख़ुद ही पल रहा है … इसकी सूरत पर सबने अच्चा नकाब है पहनाया …. प्यार का बिगड़ता रूप मेरा जी जलाता है … शुक्रिया उसका जिसने बाना छोड़ा एक ताज महल … प्यार इस दुनिया मैं भी था पता चलता है …….पलक

एक यही ख्वाहिश

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वक्त रुक जाए उस वक्त जब आप साथ हों

दूर तलक हों चंदा की चादनी और हाथों मैं उनके मेरा हाथ हों

बस एक यही ख्वाहिश है

जी भर सजाऊँ आखो मैं सपने

आप हों कुछ करीब अपने

हवाओं का जोंका कुछ खाश हों

बस एक यही ख्वाहिश है

ना कुछ कहे वो न लब मेरे कुछ बयां करे

हों कभी हम जुदा ऐसे खुदा ना करें

दिल मैं उनके भी मेरे जैसे कुछ जस्बात हों

बस एक यही ख्वाहिश है

हम जी भर कर उन्हे प्यार करें

सब कुछ उन पर निसार करें

बस वही मेरे हर गम हर खुशी के राजदार हों

बस एक यही ख्वाहिश है

हमे प्यार चाहिए था….

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हमे प्यार चाहिए था …. किसी भी कीमत पर ….. हमने इस लिए बेवाफईयो से प्यार किया……. अब तूतेगा……. तब टूटेगा…….. इसकी ख़बर हमे…….. दिलको बिखरने को हर पल तैयार किया……… दिल के कारन हम हुए गयल कितनी ………… ऐसा इसका सौदा हमने तो पहली बार किया …पलक …..

ZINDAGI HO TUM…………

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जो सासों मैं महक जाए वों खुशबु हो तुम

 

जो आंखों को नजर आए वों रौशनी हो तुम

 

जो नीद मैं समां जाए वों सपना हो तुम

 

जो कानो मैं गूंज उठे वों सुर हो तुम

 

जो हर पल साथ हो वों साया हो तुम

 

जो उठा कर हाथ मांगी वों दुआ हो तुम

 

जो धडक उठे वों दिल हो तुम

 

 

तुजे क्या पता क्या हो तुम

 

जो मुझे जिन्दा रखे वों जिन्दगी हो तुम …. BY : PALAK

एक रात….!!!!

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वो केह कर चले इतनी मुलाकात बहुत है मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है  

आसु मेरे थम जाए तो फ़िर शोख से जाना ऐसे मैं कहाँ जाओगे के बरसात बहुत है  

वो कहने लगे जाना मेरा बहुत है जरुरी नही चाहता दिल तोडू तेरा पर है मज़बूरी
गर हो गई हो कोई खता तो कर देना माफ़

 

मैंने कहा हो जाओ अब चुप करो इतनी भी बात बहुत है
समज गई हु सब और कुछ कहना जरुरी नही बस आज की रात रुक जाओ ,जाना इतना भी नही जरुरी..

 

फ़िर कभी ना आउंगी तुम्हारी जिन्दगी मैं लौट कर सारी उमर जीने के लिए आज की रात बहुत है …. बस आज की रात .. रुक जाओ ….

This poem is one of my favourite poem.. thats why i post here. hope u all like it ..whenever i read this poem in my diary i read again and again.

palak

एक ख्वाब

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आ असमान से नीद का सौदा करे, एक ख्वाब दे एक ख्वाब ले… एक ख्वाब जो आखों मैं है , आ उसको पुरा करे …. शर्म को तेरी आगोश मैं पिघलने भी दे … बोलके हल्के हल्के कानो मैं मेरे सांसों को उलझा दे मेरी सांसों से दो लफ्ज़ थे ..एक बात थी.. उमर लगी तेरी खामोशियों को बोलने मैं … सौ साल का वो एक पल था .. उस पल मैं पुरी सदियाँ बिता दें …. आ असमान का चाँद से सौदा करे रोशनी से भर दे अपना जहाँ …. पलक …..

Hindi Poems

तुजे देखने को तरसती हैं ऑंखें
तरस – तरस कर बहुत बरसती हैं ऑंखें
बरस बरस कर जब थक जाती है ऑंखें
तुजे फ़िर देखने को तरसती है ऑंखें

…पलक

These beautiful lines r from Sweetu ..It’s really fantastic..so i publish here in blog॥ …palak…

यादे…

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कुछ नम लम्हों की मुस्कुराती यादे उन खामोश लम्हों की बोलती यादे  

दिन मैं तेरे नूर से रोशन यादे शाम की लाली से बुजी बुजी वो यादे  

वो समंदर की गेली रेत पैर संग तेरे चलना अज सागर की लहर ने मिटा ली वो यादे  

बरसात की बूंदों मैं हमारा यु गुम होना वही बूंदें आज असू बन कर आती है यादों मैं  

तेरे संग रातों मैं चाँद को ताकते रहना बिखर कर अब तो तारे हो गई वो यादे  

जिस सफर मैं दो पल का हम सफर था वो उस राह पैर खड़ी अकेली वो यादे  

जिस को एक पल के लिए ना भूल सके हम उन के लिए बस बुन कर रह गई वो यादे ….

…पलक…

मगर कभी कभी …..

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तू हर दिल मैं है उनकी आरजू बन कर

काश तू बनाये मुजे अपनी आरजू कभी कभी तू लगती है फूलो मैं घुली ख्श्बू की तरह काश मेरे खयालों से तू नहाये कभी कभी तू क्या है …..! तू कौन है ……! ऐ दूर के सनम …….! बताया करुगा तुजे कभी कभी मेरी जिन्दगी खुदा की नही तेरी है नेय्मत ये कहने का गुनाह भी करुगा मगर कभी कभी ……….पलक ……

खामोशियाँ

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खामोशियाँ है तो खामोश पर एक अनसुनी ज़बान में हर बात बोलती है , यह आँखें इसका साथ देती है और हर राज खोलती है , हम हर बार यह चाहतें है की किसी को सुनाई ना दे यह पर यह है की हर वक़्त मेरी तनहाइयों में चली आती है और कहती है वो बात जो दुनिया के शोर मे खो जाती है . बस खो जाती है …… palak