28. August 2010
मिलने का मन था तो उही चले आना था बीच मै बेचारे बहाने को क्यों लाना था ?????
Continue reading...28. August 2010
क्या खूब एहसास है प्यार का मन की अँधेरी मिटटी मै पड़ा रहता है चुप चाप सा पर जब किसी सूरज काउष्म स्पर्श पाया तोह चला आता हैवो अंधेरो की मिटटी से बहार लहराता .... झूमता सफ़ेद - पाक ... खुशबूदार ------प्यार -----
Continue reading...26. August 2010
सुना हैं की मेरी किताबे आज कल तुम्हारे बिस्तर पर सोने लगी है और मेरा अधिक समय अब किताबघर में गुज़रने लगा है जहा मुझे होना चाहिए था वहा मेरी किताबे पहोच गई हैं और जहा किताबो की जगह हैं वो जगह मैंने ले ली है ये कैसी अदला बदली है .....
Continue reading...23. August 2010
लो कर दिया अब इस रिश्ते को आजाद जो तेरा और मेरा थानामो की कैद से आजाद जो अब उडने लगा है खुले असमान मै अपने वही खूबसूरत पंख फैला कर देर तक इन्हे पिंजरों मै हिफाज़त से बांध रखा था मैंने अपने वही रिश्ते को पिंजरों से सर पटकते पाया जब इनके लहूलुहान माथो ने ... और आप की घुटन ने समझाया मुझे की बहार खुले असमान मै ज़ख्म तो इन्हे लगेगे हीपर ... वे भरेगे भीपर रूह तो ज़ख़्मी नहीं होगी ....Palak
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31. August 2010
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