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Archive | Gujarati Kavita RSS feed for this section

Heart Touching

31. August 2010

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Think about That

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बहाना …..!!!!

28. August 2010

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मिलने का मन था तो उही चले आना था बीच मै बेचारे बहाने को क्यों लाना था ?????

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Khwahish 2010-08-28 13:04:00

28. August 2010

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क्या खूब एहसास है प्यार का मन की अँधेरी मिटटी मै पड़ा रहता है चुप चाप सा पर जब किसी सूरज काउष्म स्पर्श पाया तोह चला आता हैवो अंधेरो की मिटटी से बहार लहराता .... झूमता सफ़ेद - पाक ... खुशबूदार ------प्यार -----

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अदला बदली

26. August 2010

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सुना हैं की मेरी किताबे आज कल तुम्हारे बिस्तर पर सोने लगी है और मेरा अधिक समय अब किताबघर में गुज़रने लगा है जहा मुझे होना चाहिए था वहा मेरी किताबे पहोच गई हैं और जहा किताबो की जगह हैं वो जगह मैंने ले ली है ये कैसी अदला बदली है .....

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रिश्ते की आज़ादी …..

23. August 2010

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लो कर दिया अब इस रिश्ते को आजाद जो तेरा और मेरा थानामो की कैद से आजाद जो अब उडने लगा है खुले असमान मै अपने वही खूबसूरत पंख फैला कर देर तक इन्हे पिंजरों मै हिफाज़त से बांध रखा था मैंने अपने वही रिश्ते को पिंजरों से सर पटकते पाया जब इनके लहूलुहान माथो ने ... और आप की घुटन ने समझाया मुझे की बहार खुले असमान मै ज़ख्म तो इन्हे लगेगे हीपर ... वे भरेगे भीपर रूह तो ज़ख़्मी नहीं होगी ....Palak

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