एक लकीर तेरे नाम की ..

Hindi Poems

कुछ उदास कुछ खामोश कुछ बेबस से लकीरे मेरे हाथ की.. ढूंढती रहती हूं अक्सर इन लकीरों मैं एक लकीर तेरे नाम की कुछ मालूम भी हे ….. कुछ दिल भी जनता हे …. के इन लकीरों में कोई लकीर नही तेरे नाम की …. फिर भी ना जाने क्यों ढूढती रहती हूं ….. अक्सर एक लकीर तेरे नाम की …… एक लकीर तेरे नाम की…. ! एक लकीर तेरे प्यार की…. ! पलक ………..

Chand ki tarah pyar bhi…

Hindi Poems

Humne mehboob ki aankhon par Haathon ko apne rakh kar dekha… Nafraat ke aangaaro ko jab unkii Nazaron mey dehekta dekhaa…. Aur Unhii haathon ko dil par rakh kar, Apnii Hasraton ko khud apnii Aankhon se Jaltaa dekhaa… Chand ki tarah humne Pyar ko bhi marrtaa dekha…

Ek ajnabii si nazar deewar ko bhedtii hui, Ek ukhdii hui saans jigar ko chedtii huii… Khud ki talaash mey bhatak rahii hai ruhh, Do pal ka bhii nahin jaise mere naseeb mey sukoon… Ghar ke saajo-samaan ko khud par Humne haste dekha… Apne Wajood ko bhi sajawat ka saamaan Bante dekha…

Harr rishte par ek maut khud ki paayii hai, Bazaar mey jaise bolii khud apni lagayii hai… Koii zeher jaise apne haathon pee liya humne, Zehar pee ke bhee magar kaise jee liya humne… Khulii aankhon sey kaisa khaufnaak yeh sapnaa dekha… Kaii Zehreele naagon ko kadmon sey lipatt.tey dekha…

Ek hi manzar yeh har raat ka hota hai, Chand bhi aakar meri chhatt pe rota hai… Palkon mey namii hoti hai bikhrii bikhrii… Dil phir bhi nayii umeed koi pirotaa hai… Woh toh takkiye ko aangosh mey le lete hai, Jaane kaise woh chain ki neend so lete hai… Raat ki raani ko kabhii khidkii pe Mehekta dekha… Humne raaton ko aankhon aankhon mey guzartaa dekhaa…

Palak

एक सपना ..!!

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बालों में उलझती, खुद उलजाती …. तेरे चेहरे पे सरसराती …. मेरी उंगलिया होठों पर रुक जातीं …. कान मॆ धीमे से गुनगुनातीं ….. अधखुली अधजगी आखॊ में ….. अनगिनत सपने लिए ….. तेरे बदन की खुशबू को …. अपनी रूह में बसाती ….. कुछ सिमट-सिकुड कर ….. तेरी बाहॊ में टूट जाती …. काश ऐसा हो पाता …. तू मेरा और मैं तेरी हो पाती …. पलक ….

Some pages of my diary ……..

Hindi Poems

August 25, 2006 (16:23:25) Wo keh gaye hum se, abke wo humse khwabon mein milenge Koi jaa kar kah de unhe, ki wo aane ka waada to kare, hum hamesha ke liye so jaayen August 26, 2006 (15:36:25) Kashish ki nahin alfaaz ki, chahat ko to jarurat hai bus ehsaas ki Paas hote to manzar hi kya hota, door se khabar hai hamen aapki har saans ki August 30, 2006 (22:38:04) Tara vina mane akeladu lagay. Hu tane anant prem karu chu. Jivensangini hu tari bani ne rahesh tari sada. September 1, 2006 (22:21:04) Main ye soch kar uske dar se utha tha, Ki wo roke legi mana legi mujhko. Kadam aise andaaz se uth rahe the, Ki awaz deke bula legi mujhko. Magar usne roka na wapas bulaya, Na awaz hi di na… Main aahishta aahishta badhta hi aaya, Yahan tak ki usse juda ho gaya main, Juda ho gaya……. September 2, 2006 (16:30:29) Ye kis tarah yaad aa rahe ho, Ankhen band hai fir bhi nazar aa rahe ho. Naa jaane kyon aisa lagta hai, Wo haqeeqat thi aur ye sapna. September 2, 2006 (18:54:42) Khali haath shaam aayi hai, Khali haath jaayegi. Aaj bhi naa aaya koi, Khaali haath laut jaayegi… September 3, 2006 (10:33:05) Pyar ka anjaam kisne socha Hum to mohabbat kiye jaa rahe hain. Deewane hum to hain unke sanam, Bus unka naa liye jiye jaa rahe hain. September 3, 2006 (20:19:34) Pyaar ki jab koi baat chali, tum yaad aaye Jab sinduri saanjh dali, tum yaad aaye. September 3, 2006 (23:31:28) Intezaar ki ghadiyan bahut kathin hoti hain. Kitni baar uth ke darwaaja khola aur band kiya. Aankhen mundi fir khol di aur jab thak gaya, waqt guzar gaya to chirag madham kar diye. Fir kisi hawa ke jhonke ne darwaaje par dastak di. Par Jaanta tha, itni raat ko koi nahin aata par ummeed hai ki baaz nahin aati.

एक रात….!!!!

Hindi Poems

वो केह कर चले इतनी मुलाकात बहुत है मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है  

आसु मेरे थम जाए तो फ़िर शोख से जाना ऐसे मैं कहाँ जाओगे के बरसात बहुत है  

वो कहने लगे जाना मेरा बहुत है जरुरी नही चाहता दिल तोडू तेरा पर है मज़बूरी
गर हो गई हो कोई खता तो कर देना माफ़

 

मैंने कहा हो जाओ अब चुप करो इतनी भी बात बहुत है
समज गई हु सब और कुछ कहना जरुरी नही बस आज की रात रुक जाओ ,जाना इतना भी नही जरुरी..

 

फ़िर कभी ना आउंगी तुम्हारी जिन्दगी मैं लौट कर सारी उमर जीने के लिए आज की रात बहुत है …. बस आज की रात .. रुक जाओ ….

This poem is one of my favourite poem.. thats why i post here. hope u all like it ..whenever i read this poem in my diary i read again and again.

palak

बाबुल!!!

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छलके है आँखें, तरसे है मन ये, रुकी हुई है धड़कन, रुकी रुकी साँसें डगमगा रही हूँ मैं फिर चलते चलते, मुझे थामा था मेरे बचपन मे जैसे, गुडिया को अपनी अपना हाथ फिर थमा दे बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले  

वो आँगन का झूला क्या अब भी पड़ा है वो तुलसी का पौधा क्या अब भी खड़ा है वो स्तरंगी छतरी, वो बारिश का मौसम, काग़ज़ की कश्ती फिर मेरे लिये एक बना दे एक बार मुझको फिर से वो बचपन लौटा दे बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले  

वो गुडिया की कंघी, वो खेल खिलौने, वो मेरा तकिया और वो मेरे बिछौने, मेरी कुछ किताबें थी, कुछ अधूरे सपने, सपने वो मुझको एक बार फिर से लौटा दे या सामान मेरा गंगा मे बहा दे… बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले  

कैसे ज़िगर के टुकड़े को कर दिया तूने पराया, डोली के वक़्त तूने जब कलेज़े से लगाया, मैने सुना था बाबुल तेरा दिल रो रहा था, कैसे रोते दिल को तूने फिर था मनाया बाबुल वैसे ही दिल को एक बार फिर तू मना ले बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले  

लगी थरथराने जब लौ ज़िन्दगी की, मैने लाख तुझको दिये थे इशारे, माँ को भेजी थी ख़त मे एक कली मुरझाई, भेजी ना राखी, छोड़ दी भाई की सूनी कलाई मगर बेटी तुम्हारी हो चुकी थी पराई, शायद नसीब अपना समझा ना पाई, आखिरी बार मेरी आज तुम फिर कर दो विदाई लेकिन विदाई से पहले अपनी नज़र मे बसा ले बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले  

मुझे ख़ाक करने को चला था जब ज़माना, क्यों रोए थे तुम भी, मुझे ये बताना, आँखों मे अब ना आँसू फिर कभी लाना भटक रही है रूह मेरी, तेरे प्यार को फिर से माथे पे हाथ रख कर मेरी रूह को सुला दे बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले ॥

पलक …

ये कविता मैंने कही पढ़ी थी इस लिए मैं इसे यहाँ रख रही हु ..

एक यही ख्वाहिश

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वक्त रुक जाए उस वक्त जब आप साथ हों

दूर तलक हों चंदा की चादनी और हाथों मैं उनके मेरा हाथ हों

बस एक यही ख्वाहिश है

जी भर सजाऊँ आखो मैं सपने

आप हों कुछ करीब अपने

हवाओं का जोंका कुछ खाश हों

बस एक यही ख्वाहिश है

ना कुछ कहे वो न लब मेरे कुछ बयां करे

हों कभी हम जुदा ऐसे खुदा ना करें

दिल मैं उनके भी मेरे जैसे कुछ जस्बात हों

बस एक यही ख्वाहिश है

हम जी भर कर उन्हे प्यार करें

सब कुछ उन पर निसार करें

बस वही मेरे हर गम हर खुशी के राजदार हों

बस एक यही ख्वाहिश है

Untouched

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रोक दू इस जहाँ को, अगर बस चले मेरा, और रोक दू इस शाम को, कभी ना आने दू वोह सवेरा.
एक अनछुआ सा नाम …

ऐ हवा तुझे नही आजादी, और नही मेरी इजाज़त, बह जाए ना यह रूहानी खुशबू, कुछ ऐसे है उनकी आहट. थम जा ऐ समां, की आज मैं उनके साथ नही, बीते हुए लम्हों मैं जी लुंगी, बिरह का मुझे एहसास नही. तेरा आज मैं नही अगर, मुकद्दरों से यह एलान है, जहाँ-ऐ-गुमनाम तुम याद रखना, माथे पे लिखा सिर्फ़ तेरा नाम है।

पलक

कैसे बयां करू उस लम्हे को ……

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कैसे बयां करू उस लम्हे को बस शब्दों मैं …? जैसे सुखी धरती पैर हो सावन की पहली बोछार जैसे सूरज की किरण आई हो कमरे मैं पहली बार जैसे अच् उठी हो गोरी कलाई चूडियों की जनक से जैसे दुल्हन का रूम निखर उठे कर के साजन का दीदार और कैसे बयां करू उस लम्हे को जब छुआ था तुम्हारे होठो ने मेरे ओठो को पहली बार… पलक ….

महोब्बत की है….!

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तू मेरे पास नही है फ़िर भी तेरी याद ये महोब्बत की है
तेरे एहसास से महोब्बत की है

 

मैं तुम को किस तरह भूल सकती हु

मैंने तेरे वजूद से महोब्बत की है
कभी तो तुने भी मुझे याद किया होगा
मैंने उन लम्हात से महोबत की है
जिस मै हो सिर्फ़ तेरी और मेरी बाते
मैंने उस जिन्दगी से महोब्बत की है
और जो महकते हो तेरी ही महोबत से मैंने उन जस्बात से महोबत की है
तुजसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैने उस इंतज़ार से महोब्बत की है …

……..PALAK…….