कोरे कागज़ की कहानी …!

palak-khwahish

कुछ अनकही बातों से …
बयान कर जाते है…
कुछ दिल से नगमे प्यार के गुन गुनते हैं…
क्या कहे कोरा कागज़ कभी…
दर्द तो उसमे भी होता हैं…
इज़हार ना करे कभी…
की जलना उसको भी होता है
कही नही कभी किसीसे दास्तान अपनी
की दूसरों के ज़ज्बात ही वोह कहता है…
कितना कोमल है… कितना मासूम… है
सब के सपनो को आकर देता हैं…
लफ्जों को उसका आधिकार देता है…
सुनता हैं सभी की कहानी हमेशा
अपना किस्सा कभी ना किसी से कहता हैं…
क्यूंकि खामोशी का इज़हार, कभी किसी ने कहा देखा है…
की कोरे कागज़ की है ये कहानी अनसुनी ……
पलक

Missing U…!

palak-khwahish

यादों को आपकी लम्हा बना दिया करते हैं हम
उस एहसास को यूँ सहला लिया करते हैं हम
एक अरसे से आपकी इबादत में खोये थे हम कही
अब हर खुशी में आपको पा लिया करते हैं हम
कैसे करे शिकायत हम आपकी
की कभी गौर हम पर भी फरमा लिया कीजिये
की आप की बेरुखी को भी
आपका अंदाज़ मान लिया करते हैं हम …

पलक

यादें …

palak-khwahish

यादें … हकीकत से हसीं होती है ,
ये जो तेरे खयालो से सजी होती हैं ,
कभी तुम ख़ुद को मेरी नजर से देखो ,
मेरी हस्ती, मेरा एतबार.. सब तुज से ही तो है ,
तू जो आता है.. चला जाता हैं, याद आता है ..
ये जिन्दगी ..तुज पे सदके जीना सिखा दिया…
वरना कुछ और गुजर जाती ख़ुद से बेखबर …
जो तेरे साथ न गुजरा होता ….

पलक