Chand ki tarah pyar bhi…

Hindi Poems

Humne mehboob ki aankhon par Haathon ko apne rakh kar dekha… Nafraat ke aangaaro ko jab unkii Nazaron mey dehekta dekhaa…. Aur Unhii haathon ko dil par rakh kar, Apnii Hasraton ko khud apnii Aankhon se Jaltaa dekhaa… Chand ki tarah humne Pyar ko bhi marrtaa dekha…

Ek ajnabii si nazar deewar ko bhedtii hui, Ek ukhdii hui saans jigar ko chedtii huii… Khud ki talaash mey bhatak rahii hai ruhh, Do pal ka bhii nahin jaise mere naseeb mey sukoon… Ghar ke saajo-samaan ko khud par Humne haste dekha… Apne Wajood ko bhi sajawat ka saamaan Bante dekha…

Harr rishte par ek maut khud ki paayii hai, Bazaar mey jaise bolii khud apni lagayii hai… Koii zeher jaise apne haathon pee liya humne, Zehar pee ke bhee magar kaise jee liya humne… Khulii aankhon sey kaisa khaufnaak yeh sapnaa dekha… Kaii Zehreele naagon ko kadmon sey lipatt.tey dekha…

Ek hi manzar yeh har raat ka hota hai, Chand bhi aakar meri chhatt pe rota hai… Palkon mey namii hoti hai bikhrii bikhrii… Dil phir bhi nayii umeed koi pirotaa hai… Woh toh takkiye ko aangosh mey le lete hai, Jaane kaise woh chain ki neend so lete hai… Raat ki raani ko kabhii khidkii pe Mehekta dekha… Humne raaton ko aankhon aankhon mey guzartaa dekhaa…

Palak

प्यार इस दुनिया मैं भी था

Hindi Poems

नफरत पल रही है पुरी देखरेख के साथ …और प्यार बेचारा यतीम सा ख़ुद ही पल रहा है … इसकी सूरत पर सबने अच्चा नकाब है पहनाया …. प्यार का बिगड़ता रूप मेरा जी जलाता है … शुक्रिया उसका जिसने बाना छोड़ा एक ताज महल … प्यार इस दुनिया मैं भी था पता चलता है …….पलक

एक यही ख्वाहिश

Hindi Poems

वक्त रुक जाए उस वक्त जब आप साथ हों

दूर तलक हों चंदा की चादनी और हाथों मैं उनके मेरा हाथ हों

बस एक यही ख्वाहिश है

जी भर सजाऊँ आखो मैं सपने

आप हों कुछ करीब अपने

हवाओं का जोंका कुछ खाश हों

बस एक यही ख्वाहिश है

ना कुछ कहे वो न लब मेरे कुछ बयां करे

हों कभी हम जुदा ऐसे खुदा ना करें

दिल मैं उनके भी मेरे जैसे कुछ जस्बात हों

बस एक यही ख्वाहिश है

हम जी भर कर उन्हे प्यार करें

सब कुछ उन पर निसार करें

बस वही मेरे हर गम हर खुशी के राजदार हों

बस एक यही ख्वाहिश है

हमे प्यार चाहिए था….

Hindi Poems

हमे प्यार चाहिए था …. किसी भी कीमत पर ….. हमने इस लिए बेवाफईयो से प्यार किया……. अब तूतेगा……. तब टूटेगा…….. इसकी ख़बर हमे…….. दिलको बिखरने को हर पल तैयार किया……… दिल के कारन हम हुए गयल कितनी ………… ऐसा इसका सौदा हमने तो पहली बार किया …पलक …..

Ek Sapna

Hindi Poems

dream एक सपना फिसल गया हाथों से कहके … “अलविदा” देखा था जिसे बड़े प्यार से… संजोया जिसे बड़ी चाहत से… उम्मीदों का साथी सुहाना उमंगों का था वोह सहारा अब न रहा वोह सपना न रहा वोह प्यारा अफसाना बिखर के रह गई खुशिया दिल भी दर्द से लगा तड़प ने बदल गया सारा आलम तबसे जबसे… एक सपना फिसल गया हाथों से.. कहके … “अलविदा”

ZINDAGI HO TUM…………

Hindi Poems

जो सासों मैं महक जाए वों खुशबु हो तुम

 

जो आंखों को नजर आए वों रौशनी हो तुम

 

जो नीद मैं समां जाए वों सपना हो तुम

 

जो कानो मैं गूंज उठे वों सुर हो तुम

 

जो हर पल साथ हो वों साया हो तुम

 

जो उठा कर हाथ मांगी वों दुआ हो तुम

 

जो धडक उठे वों दिल हो तुम

 

 

तुजे क्या पता क्या हो तुम

 

जो मुझे जिन्दा रखे वों जिन्दगी हो तुम …. BY : PALAK

एक रात….!!!!

Hindi Poems

वो केह कर चले इतनी मुलाकात बहुत है मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है  

आसु मेरे थम जाए तो फ़िर शोख से जाना ऐसे मैं कहाँ जाओगे के बरसात बहुत है  

वो कहने लगे जाना मेरा बहुत है जरुरी नही चाहता दिल तोडू तेरा पर है मज़बूरी
गर हो गई हो कोई खता तो कर देना माफ़

 

मैंने कहा हो जाओ अब चुप करो इतनी भी बात बहुत है
समज गई हु सब और कुछ कहना जरुरी नही बस आज की रात रुक जाओ ,जाना इतना भी नही जरुरी..

 

फ़िर कभी ना आउंगी तुम्हारी जिन्दगी मैं लौट कर सारी उमर जीने के लिए आज की रात बहुत है …. बस आज की रात .. रुक जाओ ….

This poem is one of my favourite poem.. thats why i post here. hope u all like it ..whenever i read this poem in my diary i read again and again.

palak

एक ख्वाब

Hindi Poems

आ असमान से नीद का सौदा करे, एक ख्वाब दे एक ख्वाब ले… एक ख्वाब जो आखों मैं है , आ उसको पुरा करे …. शर्म को तेरी आगोश मैं पिघलने भी दे … बोलके हल्के हल्के कानो मैं मेरे सांसों को उलझा दे मेरी सांसों से दो लफ्ज़ थे ..एक बात थी.. उमर लगी तेरी खामोशियों को बोलने मैं … सौ साल का वो एक पल था .. उस पल मैं पुरी सदियाँ बिता दें …. आ असमान का चाँद से सौदा करे रोशनी से भर दे अपना जहाँ …. पलक …..

Hindi Poems

तुजे देखने को तरसती हैं ऑंखें
तरस – तरस कर बहुत बरसती हैं ऑंखें
बरस बरस कर जब थक जाती है ऑंखें
तुजे फ़िर देखने को तरसती है ऑंखें

…पलक

These beautiful lines r from Sweetu ..It’s really fantastic..so i publish here in blog॥ …palak…