यादे…

Hindi Poems

कुछ नम लम्हों की मुस्कुराती यादे उन खामोश लम्हों की बोलती यादे  

दिन मैं तेरे नूर से रोशन यादे शाम की लाली से बुजी बुजी वो यादे  

वो समंदर की गेली रेत पैर संग तेरे चलना अज सागर की लहर ने मिटा ली वो यादे  

बरसात की बूंदों मैं हमारा यु गुम होना वही बूंदें आज असू बन कर आती है यादों मैं  

तेरे संग रातों मैं चाँद को ताकते रहना बिखर कर अब तो तारे हो गई वो यादे  

जिस सफर मैं दो पल का हम सफर था वो उस राह पैर खड़ी अकेली वो यादे  

जिस को एक पल के लिए ना भूल सके हम उन के लिए बस बुन कर रह गई वो यादे ….

…पलक…

Untouched

Hindi Poems

रोक दू इस जहाँ को, अगर बस चले मेरा, और रोक दू इस शाम को, कभी ना आने दू वोह सवेरा.
एक अनछुआ सा नाम …

ऐ हवा तुझे नही आजादी, और नही मेरी इजाज़त, बह जाए ना यह रूहानी खुशबू, कुछ ऐसे है उनकी आहट. थम जा ऐ समां, की आज मैं उनके साथ नही, बीते हुए लम्हों मैं जी लुंगी, बिरह का मुझे एहसास नही. तेरा आज मैं नही अगर, मुकद्दरों से यह एलान है, जहाँ-ऐ-गुमनाम तुम याद रखना, माथे पे लिखा सिर्फ़ तेरा नाम है।

पलक

मगर कभी कभी …..

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तू हर दिल मैं है उनकी आरजू बन कर

काश तू बनाये मुजे अपनी आरजू कभी कभी तू लगती है फूलो मैं घुली ख्श्बू की तरह काश मेरे खयालों से तू नहाये कभी कभी तू क्या है …..! तू कौन है ……! ऐ दूर के सनम …….! बताया करुगा तुजे कभी कभी मेरी जिन्दगी खुदा की नही तेरी है नेय्मत ये कहने का गुनाह भी करुगा मगर कभी कभी ……….पलक ……

खामोशियाँ

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खामोशियाँ है तो खामोश पर एक अनसुनी ज़बान में हर बात बोलती है , यह आँखें इसका साथ देती है और हर राज खोलती है , हम हर बार यह चाहतें है की किसी को सुनाई ना दे यह पर यह है की हर वक़्त मेरी तनहाइयों में चली आती है और कहती है वो बात जो दुनिया के शोर मे खो जाती है . बस खो जाती है …… palak

कभी यु तो हो …

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कभी यु भी तो हो ………. दरिया का साहिल हो , पूरे चाँद की रात हो , और तुम आओ ….! कभी यु भी तो हो ….. परियों की महफिल हो , कोई तुम्हारी बात हो , और तुम आओ …..! कभी यु भी तो हो ….. ये नर्म मुलायम ठंडी हवाएं , जब घर से तुम्हारें गुज़रे , तुम्हारी खुशबू चुरा ले मेरे घर आयें , और तुम आओ …..!   कभी यु भी तो हो …… सुनी हर मंजिल हो , कोई ना मेरे साथ हो , और तुम आओ …..! कभी यु भी तो हो …… ये बादल ऐसा टूट के बरसे , मेरे दिल की तरहा मिलने को तुम्हारा दिल भी तरसे , तुम निकालो घर से और वापिस ना जा पाओ , कभी यु भी तो हों ….. तन्हाई हो , बूंदे हो , बरसात हो और तुम आओ , और कभी वापिसना जाओ …… कभी यु भी तो हों ……… पलक …….

ज़िन्दगी

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आज मीठी धूप को अंगना से , नज़र झुकाए गुजरते देखा.. अलसाये मौसम की आँखों में , बेशुमार इश्क उमडते देखा.. पीले फूलों की क्यारियों को , प्रेम गीत, गुनगुनाते सुना.. भंवरा बेचारा भर रहा आहे,

शायद वो अकेला पड़ा …. उदासी के आलम में भि… हमने ज़िन्दगी को आज , नए रंग में पसरते देखा…… Palak

Tides Of Emotions

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रंग मैंने देखे नही… तेरी तस्वीर की बात कुछ और है… एक गूँज जो कानो मैं आज भी गूंजती है… इकरार की बात कुछ और है… जीवन का सूरज डूबे तो क्या… अंधेरे में चाँदनी की बात कुछ और है… दुःख दर्द का मुझे मालूम ना था… आँखों आसू बनके छाए हो तुम, यह बात कुछ और है… रेत पे लिखा एक नाम तो क्या… हवा की मुझसे दुश्मनी थी, यह बात कुछ और है… दिन-दहाड़े किसे ढूँढती हैं… आँखों मैं छाए हो बस तुम यह बात कुछ और है…

 

पलक

तितली जो एक मुज़ को मिली ……

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  तितली जो एक मुज़ को मिली थी किताब मैं , वो अपना अक्स छोड़ गई मेरे ख्वाब मैं , अब तक वो मेरे जेहन में उल्जा सवाल है, शामिल रही जो हर घड़ी मेरे नसीब में, आंखों में नींद है ना कोई ख्वाब दूर तक, रेहते है हम भी आज कल वैसे आजाब में, मिलता है गर्दिशों से गले लग के चाँद भी , आए थे सिमट के फासले कितने सराब में, आख़िर मेरी वफ़ा का मुझे क्या सिला मिला, लिखा ना एक हर्फ़ भी उसने जवाब मैं ..!!!… पलक…..

दूरियाँ

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कुछ दूरियाँ है हमारे तुम्हारे बीच , कुछ पलों की, कुछ ख़यालों की , कुछ बातों की , कुछ सवालों की, फिर भी हम अजनबी नही ऐसा क्यों? कुछ तो है … न जाने कुछ तो है …कुछ तो है…… पलक ….