अनछुआ नाम ….!!!

palak-lamhay

रोक दू इस जहाँ को,
अगर बस चले मेरा,
और रोक दू इस शाम को,
कभी ना आने दू वोह सवेरा.

ऐ हवा तुझे नही आजादी,
और नही मेरी इजाज़त,
बह जाए ना यह रूहानी खुशबू,
कुछ ऐसे है उनकी आहट.

थम जा ऐ समां,
की आज मैं उनके साथ नही,
बीते हुए लम्हों मैं जी लुंगी,
बिरह का मुझे एहसास नही.

तेरा आज मैं नही अगर,
मुकद्दरों से यह एलान है,
जहाँ-ऐ-गुमनाम तुम याद रखना,

माथे पे लिखा सिर्फ़ तेरा नाम है।

एक अनछुआ सा नाम …

पलक


उम्मीद की डोर …!!!!

palak-lamhay

एक अनचाहा अजनबी सा मोड़
उन पुराणी पहचानी रह-गुजर पे …

एक गहरा अनजाना सा मुखौटा
उन बरसों से जाने पहचाने
धूंदले होते चेहरों पे …

एक अनजबी सी चुभन
सुनाई देती सिसकियाँ
किसी टूटे दिल की …

ये तुम्हारा उमर लंबा इंतज़ार
सांसो का ये शोर
दिल में जगी ख्वाहिशे
सब है उम्मीद की उस एक डोर से ….

पत्थर सी यादें …!!!!

palak-lamhay

यादों को देखो आज फिर,
लहराता हुआ आँचल उडा,
सुनाने को मेरे पास नही,
वोह आज भी मुझसे जुदा,
रेत पर थी लिखी मेरी कहानी,
धुप में उसकी चिता जल गई,
जोंका था हवा का अगर वोह,
फिर क्यूँ पत्थर सी यादें बन गई??

To A Lost Friend…

palak-lamhay

Sometimes, when people talk about friends, you always come to my mind and you always come to my heartfelt thoughts…

Sometimes when I hear some of your favorite songs, my eyes wet with
tears, and I look back thru the years…

Sometimes I cherish the times we spent together, and sometimes
I repent the mistakes we made…

Sometimes I think it was hard to find you, and then I realize it was the
hardest to let you go…

Do you never ever think of me?
Do you never cry like I do?
I know its been years, and people get over stuff,
But I cant, may be cuz you were an inseparable part of me…
Whether you believe it or not, I cant do anything to make you see,
How much and how much I do miss you!!

The Month Of December …..!!!!!

इस दिसम्बर के महीने मैं ठीक एक साल पहले सर्दी की काली रातों मैं छत पर किसी कोने मैं बैठे ए



इस दिसम्बर के महीने मैं 
ठीक एक साल पहले 
सर्दी की काली रातों मैं 
छत पर किसी कोने मैं बैठे 
एक दोस्त बनाया था मैंने 
थोडा सा नटखट 
थोडा सा पागल
मेरी जिन्दगी के कैनवास पर 
इन्द्रधनुष सा 
उतरा था एक अलग ही रंग 
आज फिर दिसम्बर आया है 
मगर
खबर नहीं मुज को उसकी 
वो इंतज़ार कर चला गया होगा 
मैं नए धागों को सुलझाते 
उस डोर को तोड़ बैठी 
जो कभी पिछले दिसम्बर मैं 
तारो तले बाँधी थी 


Written form “Months of the year challenge season २” with some edition ..

आइना

ये आइना हैं  जो हमेशा सच बोलता है नकाब पोश के राज़ – ऐ – चेहरा खोलता है यूँ  तो चलती है दुनिया



ये आइना हैं  जो हमेशा सच बोलता है 

नकाब पोश के राज़ – ऐ – चेहरा खोलता है 
यूँ  तो चलती है दुनिया लाख चेहरे लिए 
हर शक्श यहाँ जूठ का पाठ करता है 
मिलता  है सुकून देख कर ये आइना मुझे 
यही तो मेरी चेहरा – ऐ – तस्वीर खोलता है 
शुकून है के देख कर आइना यकीं होता है 
दयार – ऐ – दुनिया  मैं कोई तो है जो फक्त सच बोलता है..

मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बाते करते है ……..!!!!

आईने में चेहरा अपना देखा,और तस्वीर तेरी नज़र आई..ए- सितमगर आज मुझे,तेरी बेवफाई फिर नज़र आई..मिटा नह

आईने में चेहरा अपना देखा,
और तस्वीर तेरी नज़र आई..
ए- सितमगर आज मुझे,
तेरी बेवफाई फिर नज़र आई..
मिटा नही पाया तेरी कमी दिल से कभी,
आज मुझे अपनी यह मज़बूरी नज़र आई..
दर्द से जिंदा रहने का एहसास होता है,
ऐसे हालात में फंसी मुझे अपनी जिंदगी नज़र आई..
जिस पल तू खो गया कहीं भीड़ में,
उस पल से मुझे अपनी जिंदगी रुकी नज़र आई..
दो -चार ख़ुशी की बूंदें चाहे गिरी हो मुझ पर,
पर उसके बाद तो गम की बरसात नज़र आई….
जाने क्या बात थी तुझमें और तेरी यादों में,
आँखों ने तो रो दिया,पर होठों पर हंसी नज़र आई..!!!



Self…!!!!!

palak-lamhay

*****I read following lines some where from Sarveshwar Dayal Saxena and liked them a lot। I found a trueness in the words of the poet and feel a new strength with in me repeating these lines again and again। I thought of sharing it with you guys and hope the readers will also find it good. ******

शक्ति अगर सीमित है
तो हर चीज अशक्त भी है,
भुजाएं अगर छोटी है
तो सागर भी सिमटा हुआ है,
सामर्थ्य केवल इच्छा का दूसरा नाम है,
जीवन और म्रत्यु के बीच जो भूमि है,
वो नियति की नही, मेरी है ……..

Waiting For U ….!!!!

palak-lamhay

यह पत्तों की है सरसराहट
या तेरे आने का हैं यह पैगाम
दिल तो मेरा एक अरसे से चुरा ले गए तुम
अब तो मेहर कर दे मुज पर
की हर आहट पर तेरी
इंनायत किए फिरते है
आज हम पर
इतनी इबादत कर दे
चली जाए जान भी
आपके प्यार में तो गम ना होगा हमें
बस एक झलक से आज
किस्मत हमारी रंग दे …

अब तो ये इंतज़ार ख्वतम कर दे…

palak


फिर लौट आई जिन्दगी …!!!!

आज तुम्हारा ख़त मिला जिस में  तुम ने पूछा के अब हालत कैसे है मेरे दिन रात कैसे है क्या कह

आज तुम्हारा ख़त मिला 
जिस में  तुम ने पूछा 
के अब हालत कैसे है 
मेरे दिन रात कैसे है 
क्या कहू ..
के न दिन है न अब ये रात 
पर हाँ 
इतने सालो बाद 
फिर वही आप का स्पर्श 
मुझे इस ख़त के साथ 
मिल गया 
फिर लौट आई जिन्दगी 

पलक