“कितनी महोब्बत है तुम से “

कब से कहने की हिम्मत जुटा रहे है के तुम से इज़हारे महोब्बत कर ले पर  न जाने आज ऐसा क्या हुआ 

कब से कहने की हिम्मत जुटा रहे है 
के तुम से इज़हारे महोब्बत कर ले 
पर  न जाने आज ऐसा क्या हुआ 
के दिल ने कहा की 
कह ही दू आज 



जब किताब के पन्नो की सफेदी 
तुम्हारे चेहरे पर छलकती है 
दिल कही रुक सा जाता है 

जब हसी की एक ठंडी लहर 
मेरे कानो मई गूंजती है 
वक़्त कही थम सा जाता है 

ना जाने आज ऐसा क्या हुआ 
दिल ने कहा 
की कह दू आज 
“कितनी महोब्बत है तुम से “

Lamhay 2011-07-08 02:45:00

मासूम महोब्बत का बस इतना सा फ़साना हैरेत की हवेली है ..बारिश का अफसाना हैक्या शर्त -ऐ-महोब्बत हैक्…

मासूम महोब्बत का बस इतना सा फ़साना है
रेत की हवेली है ..बारिश का अफसाना है
क्या शर्त -ऐ-महोब्बत है
क्या शर्त-ऐ-ज़माना है
आवाज़ भी ज़ख़्मी है और गीत भी गुनगुनाना है
उस पार उतेरने की उम्मीद बहोत कम है
कश्ती भी पुरानी है और तूफान को भी आना है
समजे या ना समजे वो अंदाज़ महोब्बत का
एक शक्स को अखो से एक शेर सुनना है
भोली सी अदा
कोई फिर इश्क की जिद पर है

फिर आग का दरिया है और डूब कर जाना है

Lamhay 2011-06-14 07:22:00

वो ना आये पर उनकी याद आकर वफ़ा कर गयी,रही तमना हर वक़्त मिलने की मेरे अमन सुकून तबाह कर गयी,दर पर आहट…

वो ना आये पर उनकी याद आकर वफ़ा कर गयी,
रही तमना हर वक़्त मिलने की मेरे अमन सुकून तबाह कर गयी,
दर पर आहट सुनी कई बार सोचा असर दुआ कर गयी,
दरवाज़ा खोला तो कोई नहीं था मजाक हमारे साथ हवा कर गयी

फिर मिलना उसका….

ज़िन्दगी में, मिल गया फिर वो,एक रात की बात थीकुछ कह नहीं पाए हमवक़्त की बात थीआँखों से आसू बरसते र

ज़िन्दगी में, मिल गया फिर वो,
एक रात की बात थी
कुछ कह नहीं पाए हम
वक़्त की बात थी
आँखों से आसू बरसते रहे
जस्बात की बात थी
कुछ ना कहा कर भी, सब कह गया वोह,
अंदाज़ की बात थी ..
चाह कर भी ना रोक सके उसे हम,
हालत की बात थी
वो किसी और का था
किस्मत की बात थी
यह कहना ना किसी से तुम
राज़ की बात है

वफ़ा …!!!!!!

तुम मुझे मौक़ा तोह दो ऐतबार बन’नेकाथक जाओगे चाहते चाहते मेरी वफ़ा केसाथ !!!

तुम मुझे मौक़ा
तोह दो ऐतबार बन’ने
का
थक जाओगे चाहते चाहते
मेरी वफ़ा के
साथ !!!

महोब्बत ठहर जाती है..!!

हम अक्सर यह समझते हैंजिसे हम प्यार करते हैउसे हम भूल बैठे हैंमगर ऐसा नहीं होतामोहब्बत धीमी आग है…

हम अक्सर यह समझते हैं
जिसे हम प्यार करते है
उसे हम भूल बैठे हैं
मगर ऐसा नहीं होता
मोहब्बत धीमी आग है
महोब्बत ठहर जाती है !!!

हमारी रूह मै कही
मोहब्बत बैठ जाती है
भूलना चाहते है
मगर यह कम नहीं होती
किसी भी दुःख की सूरत में
कभी कोई ज़रुरत में
कभी अनजान से ग़म में
कभी लहजे की ठंडक में
उदासी की ज़रुरत में
कभी बारिश की सूरत में
हमारी आँख की नमी मै

कभी सपनो की किरच मै
कभी कतरे की सूरत में
वो आ ही जाती है
कभी ऐसा लगता है
उसे हम भूल बैठे हैं
मगर ऐसा नहीं होता …
मगर ऐसा नहीं होता….
यह हरगिज़ कम नहीं होती…
महोब्बत ठहर जाती ….

Lamhay 2011-03-04 04:52:00

ता क़यामत सोचकर देखातेरा चेहरा फिर अगर में देख लूबस एक बार ..शुक्र करते करते बाकि ज़िन्दगी कर दूँ म…

ता क़यामत सोचकर देखा
तेरा चेहरा फिर अगर में देख लू

बस एक बार ..
शुक्र करते करते बाकि ज़िन्दगी कर दूँ में गुज़र ..

WISH

ए मुहोब्बत में तेरी अदा’ओं से हु परेशांजिसे इतना चाहा उसे ही पाने की ख्वाहिश नहीं ..

ए मुहोब्बत में तेरी अदा’ओं से हु परेशां
जिसे इतना चाहा उसे ही पाने की ख्वाहिश नहीं ..

Lamhay 2011-03-04 04:40:00

तेरी सिर्फ एक ही बात मुझे ज्यादा याद आती है …..तेरा यह कहना , तुम मेरे होना चाहते हो …

तेरी सिर्फ एक ही बात
मुझे ज्यादा याद आती है …..
तेरा यह कहना ,
तुम मेरे होना चाहते हो …

Lamhay 2011-02-20 02:18:00

कौन कहता है वो मेरे बगैर तन्हा होगावो अक चिराग है कही और जलता होगा यह तो हम हैं एक सुकून सी जीलपर व

कौन कहता है वो मेरे बगैर तन्हा होगा
वो अक चिराग है कही और जलता होगा

यह तो हम हैं एक सुकून सी जील
पर वो तो एक बिखरा हुआ एक दरिया होगा
वो तो रहता होगा बेखबर से जूनून मैं
उसे क्या खबर कोई उसे सोचता होगा

वो मेरे दर्द से बे खबर नहीं था मगर
उस दुःख बाटने का ना सलीका आता होगा

इतना नादान नहीं के समाज भी ना सके
उसी का जिक्र मेरी हर ग़ज़ल मैं हुआ होगा

मैं ने उसे चाह तो चाहती ही गई
मेरी शिद्दतो से घबरा कर वो चल दिया होगा