Untouched

Hindi Poems

रोक दू इस जहाँ को, अगर बस चले मेरा, और रोक दू इस शाम को, कभी ना आने दू वोह सवेरा.
एक अनछुआ सा नाम …

ऐ हवा तुझे नही आजादी, और नही मेरी इजाज़त, बह जाए ना यह रूहानी खुशबू, कुछ ऐसे है उनकी आहट. थम जा ऐ समां, की आज मैं उनके साथ नही, बीते हुए लम्हों मैं जी लुंगी, बिरह का मुझे एहसास नही. तेरा आज मैं नही अगर, मुकद्दरों से यह एलान है, जहाँ-ऐ-गुमनाम तुम याद रखना, माथे पे लिखा सिर्फ़ तेरा नाम है।

पलक

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