कैसे बयां करू उस लम्हे को ……

कैसे बयां करू उस लम्हे को बस शब्दों मैं …? जैसे सुखी धरती पैर हो सावन की पहली बोछार जैसे सूरज की किरण आई हो कमरे मैं पहली बार जैसे अच् उठी हो गोरी कलाई चूडियों की जनक से जैसे दुल्हन का रूम निखर उठे कर के साजन का दीदार और कैसे बयां करू उस लम्हे को जब छुआ था तुम्हारे होठो ने मेरे ओठो को पहली बार… पलक ….

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