बस इतना ही तो चाहा था …..

palak-khwahish

बस इतना ही तो चाहा था …..
तेरे आँचल में मैं सो जाऊँ….
बस इतना ही तो सोचा था…
तेरी आँखों में बस जाऊँ….
क्या इतना गलत चाहा था, क्या इतना बुरा सोचा था…..
बस इतना ही तो चाहा था
तेरे सपनो में मैं खो जाऊँ….बस इतना ही तो सोचा था
तेरे गीतों के बोल में बन जाऊँ….
क्या इतना गलत चाहा था, क्या इतना बुरा सोचा था…..
बस इतना ही तो चाहा था
तेरे लबों की मुस्कान मैं बन जाऊँ ….
बस इतना ही तो सोचा था
तेरे अश्को में मैं घुल जाऊँ….
क्या इतना गलत चाहा था, क्या इतना बुरा सोचा था…..
बस इतना ही तो चाहा था
तेरी हर सांस में मैं मिल जाऊँ…
बस इतना ही तो सोचा था
तेरे हर सपने को साकार मैं कर पाऊं…
क्या इतना गलत चाहा था, क्या इतना बुरा सोचा था…..

one of my favourite poem from ” meri Poems” so i post here…

jis ne bhi likhi hai bahut sunder likhi hai ….

यादें …

palak-khwahish

यादें … हकीकत से हसीं होती है ,
ये जो तेरे खयालो से सजी होती हैं ,
कभी तुम ख़ुद को मेरी नजर से देखो ,
मेरी हस्ती, मेरा एतबार.. सब तुज से ही तो है ,
तू जो आता है.. चला जाता हैं, याद आता है ..
ये जिन्दगी ..तुज पे सदके जीना सिखा दिया…
वरना कुछ और गुजर जाती ख़ुद से बेखबर …
जो तेरे साथ न गुजरा होता ….

पलक