कैसे बयां करू उस लम्हे को ……

Hindi Poems

कैसे बयां करू उस लम्हे को बस शब्दों मैं …? जैसे सुखी धरती पैर हो सावन की पहली बोछार जैसे सूरज की किरण आई हो कमरे मैं पहली बार जैसे अच् उठी हो गोरी कलाई चूडियों की जनक से जैसे दुल्हन का रूम निखर उठे कर के साजन का दीदार और कैसे बयां करू उस लम्हे को जब छुआ था तुम्हारे होठो ने मेरे ओठो को पहली बार… पलक ….

एक रात….!!!!

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वो केह कर चले इतनी मुलाकात बहुत है मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है  

आसु मेरे थम जाए तो फ़िर शोख से जाना ऐसे मैं कहाँ जाओगे के बरसात बहुत है  

वो कहने लगे जाना मेरा बहुत है जरुरी नही चाहता दिल तोडू तेरा पर है मज़बूरी
गर हो गई हो कोई खता तो कर देना माफ़

 

मैंने कहा हो जाओ अब चुप करो इतनी भी बात बहुत है
समज गई हु सब और कुछ कहना जरुरी नही बस आज की रात रुक जाओ ,जाना इतना भी नही जरुरी..

 

फ़िर कभी ना आउंगी तुम्हारी जिन्दगी मैं लौट कर सारी उमर जीने के लिए आज की रात बहुत है …. बस आज की रात .. रुक जाओ ….

This poem is one of my favourite poem.. thats why i post here. hope u all like it ..whenever i read this poem in my diary i read again and again.

palak

ज़िन्दगी

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आज मीठी धूप को अंगना से , नज़र झुकाए गुजरते देखा.. अलसाये मौसम की आँखों में , बेशुमार इश्क उमडते देखा.. पीले फूलों की क्यारियों को , प्रेम गीत, गुनगुनाते सुना.. भंवरा बेचारा भर रहा आहे,

शायद वो अकेला पड़ा …. उदासी के आलम में भि… हमने ज़िन्दगी को आज , नए रंग में पसरते देखा…… Palak

खामोशी की आदत!!!

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मुझे इतनी भी सज़ा ना दे, मेरे प्यार की इंतहा ना ले… रुक जा ए चाँद थम जा ज़रा, दो घड़ी मुझे भी निहार ले… मैं टूट कर बिखर चली, मेरी ख़ाक को यूँ हवा ना दे…

दो बोल तुझसे सुन सकूँ कभी, मैं इंतज़ार मे सदा रही… तू चल पड़ा मुझे छोड कर, दीवार सी मैं खड़ी रही… सहम गयी हूँ बस इस बात से, कहीं मुझको तू भुला ना दे…

ये क्या किया तूने ए दिल बता, प्यार तूने क्यों किया भला… कैसे कहे अब ये मेरी ज़ुबान, इक बार तो मुझको गले लगा… ख़ामोशी की ये आदत कही, मुझे बेजुबान ही बना ना दे…

पलक

यादे…

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कुछ नम लम्हों की मुस्कुराती यादे उन खामोश लम्हों की बोलती यादे  

दिन मैं तेरे नूर से रोशन यादे शाम की लाली से बुजी बुजी वो यादे  

वो समंदर की गेली रेत पैर संग तेरे चलना अज सागर की लहर ने मिटा ली वो यादे  

बरसात की बूंदों मैं हमारा यु गुम होना वही बूंदें आज असू बन कर आती है यादों मैं  

तेरे संग रातों मैं चाँद को ताकते रहना बिखर कर अब तो तारे हो गई वो यादे  

जिस सफर मैं दो पल का हम सफर था वो उस राह पैर खड़ी अकेली वो यादे  

जिस को एक पल के लिए ना भूल सके हम उन के लिए बस बुन कर रह गई वो यादे ….

…पलक…

Ek Sapna

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dream एक सपना फिसल गया हाथों से कहके … “अलविदा” देखा था जिसे बड़े प्यार से… संजोया जिसे बड़ी चाहत से… उम्मीदों का साथी सुहाना उमंगों का था वोह सहारा अब न रहा वोह सपना न रहा वोह प्यारा अफसाना बिखर के रह गई खुशिया दिल भी दर्द से लगा तड़प ने बदल गया सारा आलम तबसे जबसे… एक सपना फिसल गया हाथों से.. कहके … “अलविदा”

प्यार इस दुनिया मैं भी था

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नफरत पल रही है पुरी देखरेख के साथ …और प्यार बेचारा यतीम सा ख़ुद ही पल रहा है … इसकी सूरत पर सबने अच्चा नकाब है पहनाया …. प्यार का बिगड़ता रूप मेरा जी जलाता है … शुक्रिया उसका जिसने बाना छोड़ा एक ताज महल … प्यार इस दुनिया मैं भी था पता चलता है …….पलक

प्यार की रस्म

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बैठे रहो मेरे पास ना जाओ कंही आज इन आखरी पलो का साथ तुम्हारी सांसो का एहसास जी लेने दो अपना यह प्यार फिर बिखर जायगी,इक काली रात ना छोडो मेरा हाथ कुछ पल बाद आप छुट जाएगा साथ बह जाने दो अपने ज़सबातो को फिर कौन सुनेगा, मेरे जाने के बाद ऐसे ना छुपाओ अपनी भीगी पालकी ना पौछेंगा कोई, मेरे बाद देखो उस चाँद को, वो सब जानता है कैसे हममे जुदा होते, तक रहा है जब आयेगी तुम्हे मेरी याद तुम भी ऐसे ही चाँद को तकना मैं काले अम्बर पर भागती आऊंगी हवा बन तुमसे लिपट जाउंगी अपने प्यार की रस्म मरकर भी निभाउंगी……………….

Untouched

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रोक दू इस जहाँ को, अगर बस चले मेरा, और रोक दू इस शाम को, कभी ना आने दू वोह सवेरा.
एक अनछुआ सा नाम …

ऐ हवा तुझे नही आजादी, और नही मेरी इजाज़त, बह जाए ना यह रूहानी खुशबू, कुछ ऐसे है उनकी आहट. थम जा ऐ समां, की आज मैं उनके साथ नही, बीते हुए लम्हों मैं जी लुंगी, बिरह का मुझे एहसास नही. तेरा आज मैं नही अगर, मुकद्दरों से यह एलान है, जहाँ-ऐ-गुमनाम तुम याद रखना, माथे पे लिखा सिर्फ़ तेरा नाम है।

पलक